Poetry

आँख में दरियाँ का सब पानी भर लेंगे By Ashish Prakash

Ghazal

Know poet

आँख में दरियाँ का सब पानी भर लेंगे
जब भी मिलेंगे दामन अपना तर लेंगे

रोज़ का मिलना न हो मुनासिब तो भी क्या
ख़्वाबों में ही मिलना जुलना कर लेंगे

शब्दों की तकरारों में क्या रखा है
ख़ामोशी से भी अब थोड़ा लड़ लेंगे

वो जो परिंदे बन के शहर बदलते हैं
कहते हैं महफ़िल में अक्सर घर लेंगे

एक फ़क़ीरे ने है जो कोई दुआ फूँकी
देखना अब है उससे भी क्या असर लेंगे

अपने दुश्मन को भी राज़ बताते हैं
हम चुन चुन के ख़ुद अपने नशतर लेंगे

प्रकाश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Enter Captcha Here : *

Reload Image

Close