Poetry

होली का दिन आया- By Chaitanya

मुस्कराते फूल हैं, पत्तियां हरी हरी,
मचली है हवा भी, मस्त मस्त चली चली,
खिली खिली धूप में, निकले हैं लोग देखो,
रंग-रूप- गंध से फिज़ां भी है भरी भरी,
मधुर सरस गान लिए, ढोलक की तान लिए,
आया आया, होली का दिन आया|
नफरत जो मन में है, आज उसे फेंक दो,
डर के छिपे असुर की, होलिका जला दो,
अच्छा हो या बुरा, मिलो सबसे खुलकर,
किसने था क्या कहा, सोच ये निकाल दो,
चलो मन में विश्वास लिए, जोश और यकीन से,
आया आया, होली का दिन आया|
हसरतों के कैद पंछियों को आज उड़ा दो,
चाहत की नदिया को आज रोकना नहीं,
प्रेम की मदिरा पिए, आशिकी के रंग को,
लगा दे उनके गालों पे, सजा दो उनके आँचल को,
प्यार भरे दिल मिले, रंगों में रंग भरे,
आया आया, होली का दिन आया|
नयी बहार लेके, नयी पुकार लेके,
आया आया, होली का दिन आया|
उमंग-तरंग लिए, मस्ती की मिठास भरा,
आया आया, होली का दिन आया|

Chaityanya

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23 thoughts on “होली का दिन आया- By Chaitanya”

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