Poetry

खुद को बेज़ार यूँ किया जाये By Samar

खुद को बेज़ार यूँ किया जाये
चलो फिर इश्क कर लिया जाये
ऐसे जीने में भी मज़ा क्या है
ज़हर ये खुद से फिर पिया जाये
उससे अब हिज्र का रिश्ता सही
वस्ल की आस में जीया जाये
मुब्तला इश्क में हुये कुछ यूँ
ज़ख्म अश्कोंं से अब सीया जाये
इश्क़ गर कुफ्र और हम काफिर
अब नमाज़ी ही बन लिया जाये
उनपे मिटने का जनून है इसको
अब समर खाक कर दिया जाये
Samar “Dr Rajan Gotra”

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