Poetry

एहसासे ज़िन्दगी तुम मेरी By Deepak Sisodia

POEM

एहसासे ज़िन्दगी तुम मेरी
जाने खुदा  या दिल जाने

ख्वाब में  जो तस्वीर  तेरी
जाने खुदा  या दिल जाने……………………………
अनजानी राहो पर मिलना
कदम मिला वो संग चलना
चाय की चुस्की लेना टपकी
बात  बात  पर  देना थपकी
रुख से तेरा पशम हटाना
नजरो  नजरो में  शर्माना
गज़ल के जैसे  बाते  तेरी
जाने कितनी  यादे  तेरी
आज भी रखी है सिरहाने

एहसासे ज़िन्दगी तुम मेरी…………………………
जाने खुदा या दिल जाने……………………
मेरा  इश्क़  मेरा  जज्बा
रूह  का  तू  मेरे  रुतबा
ना हक़  ना ही  इख्तियार
क़ामिल अब तेरा हु  यार
बाहें  रखता खुली  हुई
इंतज़ार अब बस  तेरा है
जाने कब मेरा हाफ़िज़
आ जाये फिर गले लगाने

एहसासे ज़िन्दगी तुम मेरी………………………….
जाने खुदा या दिल जाने………………………………

दीपक सिसोदिया

DEEPAK SISODIA

दीपक सिंह सिसोदिया पूर्वांचल के गाज़ीपुर में 1986 में जन्म हुआ और अवध के अयोध्या में 2006 तक अध्यन पूर्ण किया. सातवीं कक्षा में जो प्रभाव तुलसी के महाकाव्य राम चरित मानस ने डाला वो आगे दिल्ली में पढाई और अब अंतराष्ट्रीय कम्पनीओ में काम करते हुए भी कम नहीं हुआ .अपितु कब कबीर , ग़ालिब और मीर की रचनाओं के प्रभाव ने कवि और शायर बना दिया खुद को भी नहीं पता. जो कविता कभी राम के प्रेम से शुरू हुई आगे बढ़कर प्यार , खुदा, आशिकी और मन बन गयी .हिंदी या उर्दू का कोई उत्कृष्ट ज्ञान नहीं है किन्तु मन में दोनों के लिए प्रेम है और यही प्रेम और मन मिलकर रचना करवाती है .साहित्यम ने उत्साह बढ़ाया तो मन के भावो को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का साहस भी आ गया .....

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