Poetry

पावस गीत By Premlata Tripathi

 

तनिक तुम ठहरो हे ! घन मीत ।
खुशी के पल क्यों जाये बीत ।।
नयन जल भरे सजन जी आज ।
खोल दूँ हृदय पटल के राज ।
दिया है अधरों को जो गीत —-
खुशी के पल क्यों जाये बीत ।।
डूबती नौका यदि मँझधार ।
थाम कर हाँथों में पतवार ।
संग दें लहरें बनकर हाथ ।
नाव को मिले किनारा नाथ ।
नहीं मैं चाहूँ तुमसे जीत – – –
खुशी के पल क्यों जाये बीत ।।
सखा घन श्याम तुम्हीं सरताज ।
भरोसा तुम पर करती नाज ।
प्रीति की रीति न जाये रीत ।
तुम्ही हो मीत हमारे प्रीत ।
सजा दो जीवन में संगीत ।
खुशी के पल क्यों जाये बीत ।।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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