Poetry

सब मे इतना दम नही होता है By Satlaj Rahat Indori

Know Satlaj Indori

सब मे इतना दम नही होता है
जलवा तेरा कम नही होता है

फूल हमारे हाथ में होते हैं
चाकू कट्टा बम नही होता है

हिज्र की कोई शक्ल नही होती
ज़ख्मो का एलबम नही होता है

दिलजोई को इश्क़ नही कहते
हर पानी ज़मज़म नही होता है

दिल मे ऐसे ज़ख़्म हैं के जिनका
मरहम भी मरहम नही होता है

सर पे मेरे धूप उतरती है
सायो का मौसम नही होता है

मुझको बस तलवारें दिखती हैं
मुझसे अब मातम नही होता है

#सतलज_राहत

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