Poetry

मैं अपने गुनाहों से तौबा कर तो लूँ By Yogesh Rathore Yash

 

मैं अपने गुनाहों से तौबा कर तो लूँ,
पर तू मुझे मेरे गुनाह तो बता।

तुम जिसे मंदिर-मस्जिद में ढूँढते रहे,
वो तो मुझे मयखाने में मिला।

लहजा-ए-अदब उर्दू में है तो हिंदी में भी है,
तू एक बार मेरा हाल पूछने तो आ।

चचा ने सेवैयाँ भेजी हैं और हमने मिठाईयाँ,
जो दिल से हिंदुस्तानी हैं वही ले मज़ा।

नाम किसी और ग़द्दार का क्यूँ लूँ मैं देश में,
जो नेता फूट डाले उसे दो फाँसी की सज़ा।

भगत-बिस्मिल कौन थे जो साथ फाँसी चढ़े,
पर हमने नेहरु-जिन्ना को मान लिया खुदा।

70 साल में क्या खोया क्या पाया जान लो,
धर्म के नाम पे क्यूँ इंसान-इंसान से लड़ा।

आँधी आँधी के नाम से पूरा देश लूट लिया,
नींव तक ख़राब कर दी इतिहास ग़लत पढ़ा।
-यश-

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