Poetry

बचपन को याद करती हूं….. By Muskan Madhuri

Know Muskaan

बड़ी हसरतों से इक फरियाद करती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूं।।

बिना समझे ही सब समझ जाते थे
अपनी बात फिर भी न कह पाते थे
फिर उस अल्हड़पन को आबाद करती हूं
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।

ना टीवी ना मोबाइल के दिवाने थे
उन दिनों अलग ही कुछ जमाने थे
बिताए उन हसीं लम्हों को मैं याद करती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।।

हसरतें थी आसमान में उड़ जाने की
सच में चाँद ओर तारों को पाने की
फिर खुले आसमान से मैं बात करती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।।

वो छपाक छपाक पानी में उछल जाना
सहेलियों के साथ बारिश में भीग जाना
फिर उस बरसात के मैं साथ चलती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।

भूख लगने पर खूब हल्ला मचाना
आधी सब्जी बनते बनते ही खा जाना
माँ की गर्म रोटियों को मैं प्यार करती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।

वो कॉपियों के पन्नो का खुद फट जाना
टीचर के आने पर कॉपी का उलट जाना
न डूबती उन कश्तियों को दो चार करती हूँ
आज फिर अपने बचपन को मैं याद करती हूँ।।।

मुस्कान शर्मा “माधुरी”

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2 thoughts on “बचपन को याद करती हूं….. By Muskan Madhuri”

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