भरोसा भी करता है और क़सम भी देता है By Vaibhav Srivastava

वो,भरोसा भी करता है और क़सम भी देता है
मेरा महबूब यु करके मुझे वहम भी देता है

वो,हर वक़्त मेरे साथ होने का भरम भी देता है
मेरा महबूब यु खुदा होने का अहम भी देता है

वो,कई बार खुशियों के साथ गम भी देता है
मेरा महबूब पर मेरा साथ हर कदम देता है

वो,जमाने कि सोच से न इतेफाक रखता हैं
मेरा महबूब मेरे लिये मन साफ हि रखता है

वो,मुस्कुरा के मेरे सारे गम ले लेता है
मेरा महबूब जड़ सी जिन्दगी पे लतीफ़ों का अहसास रखता है

वो,खुद की सब इच्छाओं को समलित करके सब्र कहता है
मेरा महबूब मेरी ख्वाहिश को आगे हरदम रखता है

वो,कुछ नहि हु ये हकीकत जानता है मेरी
मेरा महबूब मेरे आभाव पे अपने भाव प्रथम रखता है

वो,हृदय से लगा के हृदय को आराम देता है
मेरा महबूब जिन्दगी कि सुनामी को अक्सर थाम लेता है।



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