Poetry

भरोसा भी करता है और क़सम भी देता है By Vaibhav Srivastava

वो,भरोसा भी करता है और क़सम भी देता है
मेरा महबूब यु करके मुझे वहम भी देता है

वो,हर वक़्त मेरे साथ होने का भरम भी देता है
मेरा महबूब यु खुदा होने का अहम भी देता है

वो,कई बार खुशियों के साथ गम भी देता है
मेरा महबूब पर मेरा साथ हर कदम देता है

वो,जमाने कि सोच से न इतेफाक रखता हैं
मेरा महबूब मेरे लिये मन साफ हि रखता है

वो,मुस्कुरा के मेरे सारे गम ले लेता है
मेरा महबूब जड़ सी जिन्दगी पे लतीफ़ों का अहसास रखता है

वो,खुद की सब इच्छाओं को समलित करके सब्र कहता है
मेरा महबूब मेरी ख्वाहिश को आगे हरदम रखता है

वो,कुछ नहि हु ये हकीकत जानता है मेरी
मेरा महबूब मेरे आभाव पे अपने भाव प्रथम रखता है

वो,हृदय से लगा के हृदय को आराम देता है
मेरा महबूब जिन्दगी कि सुनामी को अक्सर थाम लेता है।

 

-वैभव

Related Articles

4 thoughts on “भरोसा भी करता है और क़सम भी देता है By Vaibhav Srivastava”

  1. hey there and thank you for your information – I have definitely picked up something new from right
    here. I did however expertise several technical
    issues using this site, since I experienced to reload the
    site lots of times previous to I could get
    it to load correctly. I had been wondering if your web hosting is OK?
    Not that I’m complaining, but slow loading instances times will
    often affect your placement in google and can damage your high-quality score if
    advertising and marketing with Adwords. Well I’m adding this RSS to my e-mail and can look out for a lot
    more of your respective exciting content. Make sure you update this again very soon.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Enter Captcha Here : *

Reload Image

Check Also

Close
Close