Poetry

हनुमान जी और राजकवि दिनकर

मंगलवार जो की भक्त शिरोमणि ‘बजरंगबलि महाराज श्री हनुमान जी’ का दिन होता है ।

और राजकवि दिनकर जी ने क्या खूब हनुमान जी की प्रवति को, उनके सौम्यता, उनके भक्त प्रधानता को , उनके समर्पण और उनके आक्रोश की कितनी खूबसूरती से इन एक कविता में दर्शाया है, ये हम सभी साहित्य प्रेमियों के लिए सीखने की बात है ।
हे सूरज बस इतना याद रहे कि संकट एक सूरज वंश पे है,
लंका के नीच रावण द्वारा आघात दिनेश वंश पे है।
इसलिए छिपे रहना भगवन जब तक न जड़ी पहुंचा दूं मैं,
बस तभी प्रकट होना दिनकर जब संकट निशा मिटा दूं मैं।

मेरे आने से पहले यदि किरणों का चमत्कार होगा,
तो सूर्यवंश में सूर्य देव निश्चित ही अंधकार होगा।
आशा है स्वल्प प्रार्थना यह, सच्चे जी से स्वीकारोगे,
लक्ष्मण की क्षतिग्रस्त अवस्था को होकर करुणार्ध निहारोगे।

 

ये थी विनम्रता की पराकाष्ठा ऐसी विनम्रता आज प्रत्येक मनुष्य में होनी चाहिए…लेकिन हनुमान जी की प्रार्थना यहीं समाप्त नहीं हुई…इस विनम्र प्रार्थना के बाद सूर्य देव के समक्ष हनुमान बोलता है…वो हनुमान जिसने उन्हें अपने मुंह में बन्द कर लिया था।
कैसे देते हैं अपना परिचय वीर हनुमान…

अन्यथा क्षमा करना दिनकर, अंजनी तनय से पाला है,
बचपन से जान रहे हो तुम हनुमत कितना मतवाला है।
मुख में तुमको धर रखने का फिर वही क्रूर साधन होगा,
बंदी मोचन तब होगा,जब लक्ष्मण का दुःख भंजन होगा।

ये विनम्रता हमें अपने हनुमान से सीखने की आवश्यकता है। आपकी शक्ति की सार्थकता तभी है जब आप विनम्र रहें। और मित्रों सूर्य देव को धमकी देने के बाद यहीं पर बात समाप्त नहीं होती। फिर हनुमान कहते हैं ये तो राम का काम है। इसमें तो आपका सहयोग होना ही चाहिए और फिर वो उनसे अपने साथ आने को कहते हैं। क्या कहते हैं हनुमान…

हे मित्र देव इस याचक की याचना न अस्विकार करो
राघव के दिल की पीड़ा का मिलकर अब संहार करो
उनके जीवन का तमस नहीं अब मुझसे देखा जाता है
मेरी इस अभिलाषा में बस एक दीप्ति निर्माण करो –

श्री दिनकर जी

Related Articles

26 thoughts on “हनुमान जी और राजकवि दिनकर”

  1. Thanks for your personal marvelous posting! I quite enjoyed reading it, you could be
    a great author. I will be sure to bookmark your blog
    and may come back very soon. I want to encourage you to definitely continue your great work, have a
    nice afternoon!

  2. “Thank you a lot for sharing this with all of us you actually recognise what you’re speaking about! Bookmarked. Please also seek advice from my web site =). We can have a hyperlink exchange arrangement among us!”

  3. Howdy! I could have sworn I’ve visited this blog before but after browsing through a few of the articles I
    realized it’s new to me. Nonetheless, I’m certainly pleased I
    came across it and I’ll be book-marking it and checking back
    frequently!

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Enter Captcha Here : *

Reload Image

Close