Poetry

तुम पे मरता है By Yogesh Rathore Yash

Know Yash

सुनो ना तुम दिल मेरा क्या अब भी धड़कता रहता है,
क्या नाम तुम्हारा लेता है, क्या कहता तुम पे मरता है.

तुम्हारे सपने देख देख क्या अब भी नींद से जागता है,
कब्र में छुपके बैठा है, क्या कब्र से अब भी तान्कता है,

तेरे एक एक आँसू की कीमत का मैने मोल चुकाया था,
तेरे लब की हँसी की खातिर ही मैने जीवन गँवाया था.

बस एक ख्वाइश रखी थी मैने की मैं तुझपे अभिमान करूँ,
मेरी कब्र की सूखी मिट्टी से तेरे लब का सम्मान करूँ

चुपके से ना जाना डॉली में, एकबार तो मिलने आ जाना,
मृत पड़ी पत्थर सी आँखों को अमृत का पान करा जाना.

शोर शराबा नहीं करूँगा ना ही कोई गीत गुणगान करूँ,
चुपके से तुझको देखूं और मैं जीवन का आत्म दान करूँ.
-यश-

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29 thoughts on “तुम पे मरता है By Yogesh Rathore Yash”

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